Supreme Court Reservation New Rules: क्या आरक्षित श्रेणी के छात्र जनरल सीट पर नौकरी पा सकते हैं? जानिए पूरा सच!

Supreme Court Reservation Verdict: क्या आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार अब जनरल (UR) सीट पर नहीं चुने जा सकेंगे?

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अक्सर सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या SC/ST/OBC उम्मीदवार सामान्य श्रेणी (General/UR) की सीटों पर अपनी जगह बना सकते हैं या नहीं। हाल ही में सोशल मीडिया और समाचार पत्रों में दो विरोधाभासी खबरें आईं, जिससे छात्रों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। इस लेख में हम इसी गुत्थी को सुलझाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट के दो अहम फैसले और भ्रम: क्या कहते हैं नियम?

इस लेख में दो अलग-अलग फैसलों का जिक्र किया गया है जो देखने में विपरीत लगते हैं, लेकिन उनका आधार अलग है –

फैसला A: पहला फैसला मेधावी आरक्षित उम्मीदवार जनरल सीट के हकदार हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ‘अनारक्षित’ (UR) श्रेणी का मतलब किसी खास जाति के लिए आरक्षित होना नहीं है। यदि SC/ST/OBC या EWS का कोई मेधावी छात्र जनरल कट-ऑफ से अधिक अंक लाता है, तो वह शुद्ध मेरिट के आधार पर जनरल सीट पर नियुक्त होने का हकदार है। जस्टिस दत्ता के अनुसार, ‘ओपन’ कैटेगरी किसी विशेष जाति के लिए आरक्षित नहीं है, यह सबके लिए खुली है। इसे आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों की बड़ी जीत माना जाता है।

फैसला B: दूसरा फैसला (प्रक्रियात्मक लाभ के पक्ष में) आरक्षण का लाभ लेने पर जनरल सीट पर दावा नहीं। 7 जनवरी के एक हालिया फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि किसी उम्मीदवार ने भर्ती प्रक्रिया के किसी भी चरण में आरक्षण का लाभ (जैसे आयु सीमा में छूट या प्रीलिम्स में कम कट-ऑफ का लाभ) लिया है, तो वह बाद में जनरल सीट का दावा नहीं कर सकता। भले ही उसके अंक जनरल उम्मीदवार से अधिक हों, उसे उसकी अपनी आरक्षित श्रेणी में ही माना जाएगा।

 

उदाहरणों से समझें (साफ और सरल भाषा में) – इस लेख में हमने तीन उदाहरणों के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की है:

उदाहरण 1 (राम कुमार): राम कुमार OBC से हैं। जनरल के लिए उम्र 40 साल थी, लेकिन उनकी उम्र 42 साल थी। यदि वह आयु में छूट (Age Relaxation) लेकर फॉर्म भरता है, तो उसने आरक्षण का लाभ ले लिया है। अब चाहे उसके नंबर कितने भी ज्यादा हों, उसका चयन उसकी अपनी आरक्षित श्रेणी (OBC/SC/ST) में ही होगा, वह ‘सामान्य’ सीट नहीं ले पाएगा।

उदाहरण 2 (कृष्ण कुमार): मान लीजिए प्रीलिम्स का जनरल कट-ऑफ 80 था और आरक्षित वर्ग के लिए 75। कृष्ण कुमार (SC) के 78 नंबर आए। वे आरक्षित वर्ग की रियायत के कारण मेन्स के लिए क्वालीफाई किया। अब वे फाइनल मेरिट में जनरल सीट पर दावा नहीं कर पाएंगे क्योंकि उन्होंने प्रारंभिक स्तर पर आरक्षण का सहारा लिया, इसलिए अब वे जनरल सीट पर फाइट नहीं कर पाएंगे।

उदाहरण 3 (रोहित कुमार):रोहित कुमार (OBC) की उम्र 32 साल है (जो जनरल की सीमा के अंदर है) और उन्होंने प्रीलिम्स में भी जनरल कट-ऑफ से ज्यादा अंक पाए हैं। उन्होंने कहीं भी आरक्षण का लाभ नहीं लिया। ऐसे में यदि उनके फाइनल मार्क्स जनरल कट-ऑफ से ऊपर आते हैं, तो उनका चयन जनरल (UR) सीट पर होगा।

निष्कर्ष

दोनों आदेश अपनी-अपनी जगह सही हैं। संक्षेप में कहें तो, नियम यह है कि यदि आप बिना किसी छूट (Age or Marks relaxation) के अपनी योग्यता के दम पर जनरल कट-ऑफ पार करते हैं, तो आपका चयन जनरल सीट पर होगा। लेकिन यदि आपने भर्ती के किसी भी स्तर पर आरक्षण की किसी “सुविधा” का लाभ ले लिया है, तो आप अपनी ही कैटेगरी तक सीमित रहेंगे। यह जानकारी उन सभी छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं ताकि वे अपनी रणनीति सही ढंग से बना सकें।

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